सीता द्वार मंदिर की सफाई पर उठे सवाल! लक्ष्मण झील की बदहाली को लेकर स्थानीय लोगों ने लगाई गुहार
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सीता द्वार मंदिर की सफाई पर उठे सवाल! लक्ष्मण झील की बदहाली को लेकर स्थानीय लोगों ने लगाई गुहार
14 लाइटों से लेकर सफाई बजट तक पर उठे सवाल, स्थलीय निरीक्षण और सरकारी खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग
श्रावस्ती | विराट न्यूज़ 24 लाइव
श्रावस्ती। जनपद के इकौना ब्लॉक अंतर्गत स्थित प्रसिद्ध सीता द्वार मंदिर परिसर की साफ-सफाई और लक्ष्मण झील के रखरखाव को लेकर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं। धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस स्थल की व्यवस्थाओं को लेकर लोगों ने प्रशासन से जवाब मांगा है। स्थानीय लोगों की मांग है कि मंदिर परिसर और झील का स्थलीय निरीक्षण कराकर सफाई व्यवस्था, प्रकाश सुविधाओं तथा सरकारी धनराशि से कराए गए कार्यों की वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।

लक्ष्मण झील की सफाई पर सवाल, आखिर धरातल पर क्या हुआ काम?
स्थानीय लोगों का कहना है कि सीता द्वार मंदिर परिसर और लक्ष्मण झील की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, लेकिन वर्तमान व्यवस्था को लेकर संतोषजनक स्थिति दिखाई नहीं देने का आरोप है।
लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि सफाई और रखरखाव के लिए धनराशि स्वीकृत की गई है, तो उसका वास्तविक लाभ स्थल पर क्यों नहीं दिखाई दे रहा है? झील की नियमित सफाई कौन करा रहा है और इसकी निगरानी की जिम्मेदारी किस विभाग के पास है?
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सफाई कार्यों के लिए स्वीकृत बजट, खर्च की गई धनराशि, कार्यदायी संस्था और भुगतान से संबंधित अभिलेखों की जांच कराई जाए। हालांकि, सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च होने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित सरकारी अभिलेखों की जांच अभी आवश्यक है।
14 लाइटें लगाने की बात, मौजूदा स्थिति की जांच की मांग
मंदिर परिसर में प्रकाश व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, परिसर में 14 लाइटें लगाए जाने की बात कही जाती है। ऐसे में लोगों ने मांग की है कि मौके पर जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि कितनी लाइटें लगाई गई थीं और वर्तमान में कितनी चालू हालत में हैं।
यदि लाइटें खराब हैं, तो उनकी मरम्मत क्यों नहीं कराई गई? क्या परिसर की प्रकाश व्यवस्था का नियमित निरीक्षण किया जाता है? इन सवालों पर संबंधित विभाग से जवाब मांगा गया है।
श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और नियमित रखरखाव सुनिश्चित करना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों से जुड़ा स्थल, फिर व्यवस्थाओं पर सवाल क्यों?
स्थानीय लोगों के मुताबिक, सीता द्वार मंदिर परिसर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम दो बार आयोजित हो चुके हैं। ऐसे में लोगों का कहना है कि इस महत्वपूर्ण स्थल की स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं पर नियमित ध्यान दिया जाना चाहिए।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मंदिर परिसर की व्यवस्था केवल विशेष आयोजनों तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे वर्ष साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और रखरखाव की निगरानी सुनिश्चित की जाए।

सफाई व्यवस्था की निगरानी कौन कर रहा है?
स्थानीय लोगों ने सफाई कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कागजी दावों के बजाय मौके पर किए गए कार्यों की जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि संबंधित अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंचकर लक्ष्मण झील और मंदिर परिसर का निरीक्षण करे। सफाई से संबंधित अभिलेखों का सत्यापन कराया जाए और यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
आवाज उठाने वालों ने जताई दबाव की आशंका
इस मुद्दे को उठाने वाले कुछ स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि समस्याओं को सामने लाने पर उन पर दबाव बनाया जा सकता है। कुछ लोगों ने फर्जी मुकदमों में नाम शामिल किए जाने की आशंका भी व्यक्त की है।
हालांकि, इन आशंकाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना भी जरूरी है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि यदि किसी व्यक्ति को शिकायत के कारण धमकी या अनुचित दबाव का सामना करना पड़ता है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए।
स्थानीय लोगों की प्रमुख मांगें
स्थानीय लोगों ने प्रशासन के सामने प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें रखी हैं—
- सीता द्वार मंदिर परिसर और लक्ष्मण झील का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए।
- सफाई एवं रखरखाव के लिए स्वीकृत धनराशि और खर्च का विवरण सार्वजनिक किया जाए।
- परिसर में बताई जा रही 14 लाइटों की वास्तविक स्थिति की जांच हो।
- झील और मंदिर परिसर की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए।
- कार्यों से संबंधित सरकारी अभिलेखों का सत्यापन कराया जाए।
- अनियमितता या लापरवाही प्रमाणित होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो।
अब प्रशासन के जवाब का इंतजार
सीता द्वार मंदिर और लक्ष्मण झील की व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बीच अब स्थानीय लोगों को प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार है। लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग मौके की वास्तविक स्थिति और सरकारी अभिलेखों के आधार पर पूरे मामले को स्पष्ट करे।
बड़ा सवाल यह है कि लक्ष्मण झील की सफाई और मंदिर परिसर के रखरखाव की जिम्मेदारी निभाने वाले विभाग की ओर से अब तक क्या कदम उठाए गए हैं? क्या परिसर में लगाई गई बताई जा रही लाइटों की जांच होगी? क्या सफाई कार्यों पर खर्च की गई धनराशि का विवरण सार्वजनिक किया जाएगा?
इन सवालों के जवाब संबंधित विभाग की जांच और आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
विराट न्यूज़ 24 लाइव की जनहित में पहल: धार्मिक स्थलों की स्वच्छता, सार्वजनिक सुविधाओं और सरकारी धन के उपयोग से जुड़े मामलों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही जरूरी है। इस मामले में संबंधित विभाग और प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
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